मुंगेली— कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेली द्वारा रबी मौसम के अंतर्गत किसानों को आधुनिक एवं लाभकारी कृषि तकनीकों से अवगत कराने के उद्देश्य से जीरो टिल सीड ड्रिल मशीन से गेहूं की बुवाई का सफल प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य धान कटाई के तुरंत बाद बिना जुताई के गेहूं की समय पर बुवाई कर उत्पादन बढ़ाने एवं खेती की लागत कम करने की तकनीक को किसानों तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम में बताया कि जीरो टिलेज तकनीक के माध्यम से खेत की जुताई की आवश्यकता नहीं होती, जिससे डीजल, समय और श्रम की उल्लेखनीय बचत होती है। धान की कटाई के बाद खेत में मौजूद नमी का उपयोग करते हुए जीरो टिल सीड ड्रिल मशीन से बीज एवं उर्वरक एक साथ डालने से अंकुरण बेहतर होता है तथा फसल की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है। कृषि विज्ञान केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. थानेश्वर कुमार देवांगन ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि इस तकनीक को अपनाने से परंपरागत विधि की तुलना में खेती की लागत में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक कमी आती है। इसके साथ ही प्रति एकड़ लगभग 2 से 3 हजार रुपये की बचत संभव है, जबकि उत्पादन सामान्य विधि से लगाए गए गेहूं के बराबर प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि जीरो टिलेज तकनीक से मिट्टी में नमी बनी रहती है, पानी की बचत होती है और पराली जलाने की समस्या से भी निजात मिलती है। यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है, जिससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है। कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेली द्वारा किसानों से अपील की गई कि वे गेहूं की खेती में जीरो टिल सीड ड्रिल तकनीक को अपनाकर कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त करें और आधुनिक कृषि की ओर कदम बढ़ाएं।





















































