मुंगेली— कृषि विज्ञान केंद्र, मुंगेली के तत्वावधान में क्लस्टर फ्रंट लाइन डिमॉन्स्ट्रेशन (सीएफएलडी) कार्यक्रम के अंतर्गत विकासखंड मुंगेली के ग्राम गीधा एवं लिम्हा के किसानों का प्रक्षेत्र भ्रमण आयोजित किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य किसानों को नवीन, वैज्ञानिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों से अवगत कराना तथा प्रत्यक्ष खेत के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उपायों को समझाना रहा। कृषि विज्ञान केंद्र, मुंगेली द्वारा चयनित किसानों के प्रक्षेत्रों में बायोफोर्टिफाइड गेहूँ की उन्नत किस्म HI 1634 (पूसा अहेलिया) का प्रदर्शन किया गया है। यह किस्म अधिक उत्पादन क्षमता के साथ-साथ पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जा रही है। प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान किसानों को फसल की वर्तमान स्थिति, पौधों की वृद्धि, दाने की गुणवत्ता एवं संभावित उत्पादन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. थानेश्वर देवांगन ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं जल प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्नत प्रजातियों के साथ वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। इसी क्रम में कृषि अभियंता पल्लवी पोरते द्वारा किसानों को कीट एवं रोग प्रबंधन, आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग तथा फसल उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक विधियों के बारे में विस्तार से समझाया गया। उन्होंने बताया कि समय पर कीट एवं रोग नियंत्रण, यंत्रीकरण का सही उपयोग तथा नवीन तकनीकों को अपनाने से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से श्रम लागत कम करने एवं कार्यक्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान केवीके विशेषज्ञों ने खेत पर ही फसलों का निरीक्षण किया तथा किसानों द्वारा बताई गई समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुझाया। वैज्ञानिकों ने किसानों को रोग की पहचान, पोषक तत्वों की कमी के लक्षण तथा उनके उचित उपचार के बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान किया। विशेषज्ञों ने बताया कि सीएफएलडी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों तक नवीन कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष खेत के माध्यम से पहुँचाना है, ताकि किसान स्वयं परिणाम देखकर नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हों। इससे न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी और क्षेत्र में कृषि विकास को गति मिलेगी। भ्रमण के दौरान किसानों ने अपने अनुभव साझा किए एवं वैज्ञानिकों से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किए जा रहे इस प्रकार के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रक्षेत्र भ्रमण से उन्हें नई जानकारी मिलती है और खेती को उन्नत बनाने में मदद मिलती है।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के विषय विशेषज्ञगण, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में किसानों से उन्नत तकनीकों को अपनाने एवं अन्य किसानों तक जानकारी पहुँचाने की अपील की गई।




















































