मुंगेली— यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) द्वारा एसटी, एससी, ओबीसी, महिला एवं पीडब्ल्यूडी (शारीरिक रूप से दिव्यांग) वर्ग के लिए अलग-अलग समितियां गठित करने हेतु लागू किए गए नए नियमों के विरोध में अखंड ब्राह्मण समाज सेवा समिति, मुंगेली द्वारा प्रधानमंत्री भारत सरकार के नाम अपर कलेक्टर जी एल यादव को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा कि यूजीसी द्वारा लागू किए गए ये नियम संविधान की मूल भावना और समानता के सिद्धांत के विपरीत हैं। इससे शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के बीच वर्ग और जातिगत विभाजन की भावना उत्पन्न होगी, जो सामाजिक समरसता के लिए घातक है। समिति का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सभी छात्रों को समान अवसर मिलना चाहिए, न कि जाति या वर्ग के आधार पर अलग-अलग नियम लागू किए जाएं। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे एकतरफा नियमों से झूठे एवं दुर्भावनापूर्ण मामलों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे निर्दोष छात्रों का भविष्य प्रभावित होने की आशंका है। वर्ष 2024 में प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि एसटी/एससी एक्ट के अंतर्गत दर्ज मामलों में बहुत कम प्रतिशत ही सत्य सिद्ध होते हैं, जबकि अधिकांश मामले निराधार पाए जाते हैं। अखंड ब्राह्मण समाज ने मांग की कि यूजीसी द्वारा जारी उक्त अधिसूचना पर पुनर्विचार किया जाए तथा इसे वापस लिया जाए, जिससे शिक्षा व्यवस्था में समानता, न्याय और सौहार्द बना रहे। इस अवसर पर नपा अध्यक्ष रोहित शुक्ला, पूर्व कांग्रेस शहर अध्यक्ष स्वतंत्र मिश्रा, देवेंद्र पांडे, मनोज मिश्रा, अवनीश तिवारी, रविन्द्र तिवारी, प्रदेश महासचिव अखंड ब्राह्मण समाज मंजू शर्मा, जिला अध्यक्ष उर्वशी पाठक, सचिव कल्पना मिश्रा, रश्मि तिवारी, नीशू मिश्रा, रानी मिश्रा, लक्ष्मी पांडेय, पूनम चौबे, सीमा तिवारी, प्रियंका पांडेय, उषा पांडेय, अंजूलता पांडेय, मौली पाठक, माही पाठक, परी पाठक, आर्ची पांडेय सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।




















































